गधे के पेट में बच्चा भाग 2 | Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 2

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गधे के पेट में बच्चा भाग 2 | Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 2
Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 2

गधे के पेट में बच्चा भाग 2 | Moral Story, Hindi Kahaniya

अब हम देखने वाले हैं कि राधा और सुंदर कैसे अपना जीवन व्यतीत करते हैं।

अब राधा और सुंदर जंगल में रहकर हरी भरी घास खाते हैं, मगर उन्हें वहां एक शिकारी देख लेता है और शिकारी मन ही मन में सोचता है अरे यह तो गधा और गधी है इन्हें अगर मैं पकड़ लूं और बेचने जाऊं तो मेरा बहुत सारा मुनाफा हो जाएगा। ऐसा बोलकर शिकारी अपने पास रस्सी लेकर उन दोनों के पास चला जाता है और उनके गले में रस्सी डाल देता है। तब गधा गधी से बोलता है, भाग्यवान अब यह हमें पकड़कर ले जाएगा अब हम क्या करें। तब गधी कहती है, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा यह अब हमें छोड़ने वाला नहीं चलो, यह तो हमारे कर्म है। तब गधा कहता है, हां भाग्यवान ऐसा ही कुछ मुझे प्रतीत हो रहा है चलो, ज्यादा कुछ किया तो यह हमें मारकर जख्मी कर देगा। हां चलिए, अब वो दोनों उस शिकारी के साथ निकल जाते हैं और वह शिकारी उन दोनों को बाजार में जाकर बेचने लगता है।

आओ-आओ गधा और गधी के जोड़े के दाम सिर्फ 5 हज़ार रुपए है आओ-आओ लेकर जाओ यह सौदा फायदे का है। ऐसा सुनकर दो-तीन लोग वहां आ जाते हैं और कहते हैं अरे भाई यह गधी तो गर्भिणी है, इसके पेट में बच्चा है। इसका भी कुछ काम नहीं है और हम इसे कुछ काम करवा भी नहीं सकते हैं। तब शिकारी कहता है, अरे-अरे भाई कुछ दिनों बाद यह गधी काम में आएगी ना आप इसकी चिंता मत करो यह दोनों बहुत काम करेंगे। आप चाहो तो आजमा कर देख सकते हो। ऐसा कह रहे हो तो ठीक है हम इसकी पीठ पर कुछ सामान लादकर देखते हैं जिससे हमें पता चलेगा कि सच में यह गधे काम के है या नही अरे आप जो चाहे वो देख लीजिए जवान है यह गधे, दोनों की यह बातें सुनकर गधों को भी पता चल गया कि यह सब हमारे ऊपर बहुत सारा बोझ डालने वाले हैं और ऐसा ही हुआ उन लोगों ने उन दोनों के पीठ पर बहुत भारी भरकम बोझ लाद दिया। उन्हें बोझ उठाने की आदत न होने की वजह से वह दर्द से चिल्लाने लगे।

तब खरीदने वाला व्यक्ति कहता है, अरे यह गधे तो मेरे कुछ काम के नहीं है। अब मैं क्या करूंगा इन गधे को लेकर तब शिकारी कहता है, अरे नहीं-नहीं भाई साहब, यह आपके लिए सिर्फ 5 हज़ार रुपए के हैं आप सिर्फ 5 हज़ार रुपए दे दीजिए। तब खरीदने वाला व्यक्ति कहता है, मुझे कुछ भी नहीं चाहिए। तुम्हारे यह गधे तुम्हारे पास रखो। तभी वहां एक दूसरा आदमी आता है वह आदमी कुम्हार था। वो यह सब देखकर वहां आया और कहता है भाई साहब कितने में दिए यह गधे मैं मिट्टी लेकर जाने के लिए और घड़े बेचने के लिए इन्हें खरीदना चाहता हूं। तब शिकारी कहता है, भाई साहब आपके लिए यह गधे सिर्फ 5 हज़ार रुपए में है ले लीजिए इन्हें, अब कुम्हार उनको खरीद कर घर ले कर चला जाता है और घर जाकर अपने घर के बाहर बांध देता है और घर में जाकर सो जाता है। तभी गधा गधी से बोलता है, यह हमें मिट्टी लाने के लिए और मटके बेचने के लिए बाजार में लेकर जाने वाला है। तब गधी कहती है हां, मुझे भी ऐसा ही लग रहा है यह सब हमारे कर्मों की सजा है। हमें यह सब भुगतना ही पड़ेगा। तब गधा कहता है, हां भाग्यवान यह तो सच है। अब वो दोनों दिन भर के भूखे प्यासे बाहर बैठ कर सो जाते हैं और अगले दिन क्या होगा, इसका इंतजार उनको रहता है।

अब अगले दिन कुम्हार अपने गधों को थोड़ी घास डाल देता है, वो दोनों दिन भर भूखे होने की वजह से खाने पर टूट पड़ते हैं और खाना खाने के बाद कुम्हार उनको नदी पर ले कर चला जाता है। गधे पानी पीकर बहुत खुश हो जाते हैं और अब खाना खाने की वजह से उनके शरीर में उन्हें फुर्ती सी लग रही थी और इसी वजह से अब कुम्हार उनके पीठ पर मिट्टी की बोरी लादकर घर के लिए निकलता है। वो गधे के ऊपर ज्यादा वजन की बोरी रखता है और गधी के ऊपर कम वजन की बोरी रखता है। इसी वजह से वह आराम-आराम से अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे। अब गधी के दिन भर रहे थे और गधी भी अब ज्यादा बोझ नहीं उठा पा रही थी यह सब देखकर कुम्हार उसको कम काम करने को देता था। वैसे कुम्हार मन का एक सच्चा इंसान था। वो उन दोनों का अच्छे से देखभाल किया करता था और अब कुछ दिनों के बाद गधी से उसने काम करवाना बंद कर दिया। यह सब देख कर एक दिन गधी अपने पति से बोली, अजी यह कुम्हार मन का बहुत अच्छा इंसान है। मुझे कितने अच्छे से रख रहा है।

तब गधा कहता है, हां भाग्यवान तुम सच कह रही हो यह इंसान भला है। जब हम इस श्राप से मुक्त हो जाएंगे तो हम इस कुम्हार का बड़े मन से आभार व्यक्त करेंगे। तब गधी कहती है, हां यह तो हम जरूर करेंगे। अब यह सब बातें करके गधा और गधी आराम से सो जाते हैं और अगले दिन अपने काम में दोनों व्यस्त हो जाते हैं और काम करते-करते गधी के 9 महीने पूरे हो गए थे और अब गधे के बच्चे का जन्म होना था। उसने एक सुंदर सा बच्चे को जन्म दिया और अब वह दोनों मनुष्य की आवाज में बोल सकते थे। यह सब देखकर कुम्हार हैरान रह जाता है और खुद से ही बोलता है गधी को कैसे मनुष्य का बच्चा हुआ, यह कैसे हुआ मुझे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा है। तब गधा और गधी कहते हैं मालिक यह हमारा बच्चा है हम दोनों का तब कुम्हार कहता है, क्या तुम दोनों बोल सकते हो तब गधा कहता है हां मालिक हम बोल सकते हैं। हम दोनों इंसान ही है मगर हम श्राप की वजह से एक गधा और गधी में परिवर्तित हो गए। वह हमारे कर्मों की सजा है। तब गधी कहती है, हां मालिक अब हम बोल सकते हैं क्या आप हम पर कृपा करेंगे।

तब कुम्हार कहता है, क्या कहना चाहते हो तब गधी कहती है, मालिक हमारा बच्चा जब तक बड़ा नहीं हो जाता तब तक इसकी देखभाल आप करेंगे। ऐसा वचन आप हमें दे दीजिए। तब कुम्हार कहता है, यह सब क्या बोल रहे हो अगर यह सच है तो मैं इसका अपने बच्चे जैसा ही ख्याल रखूंगा। आप निश्चिंत हो जाइए मैं अपने बच्चे की तरह ही इसकी देखभाल करूंगा। तब गधी कहती है, मालिक आपका दिल बहुत बड़ा है आपके जैसा आदमी लाखों में एक होता है आपको बहुत-बहुत धन्यवाद मालिक। ऐसा बोलकर गधी रोने लगती है और मन ही मन में कुम्हार का धन्यवाद दे रही थी। अब कुछ दिन बीत जाते हैं और कुछ दिनों के बाद गधा और गधी अपने बेटे को देखकर बहुत खुश हो रहे थे। कुम्हार की कोई औलाद ना होने के कारण वो उस बच्चे की बहुत मन लगाकर देखभाल करता है। अब ऐसे ही कुछ साल बीत जाते हैं और गधी का बच्चा बड़ा हो जाता है। अब वो गधी के कहे मुताबिक सिद्ध बाबा के पास चला जाता है और वहां जाकर वो सिद्ध बाबा से मिलता है और कहता है प्रणाम बाबा।

तब सिद्ध बाबा कहते हैं, आओ बालक बैठो तुम्हारे माता-पिता के बारे में मैं आज तुम्हें सब कुछ बताने वाला हूं। आओ यहां बैठो, अब बाबा उसे सब बताने लगते हैं कि कैसे वह इंसान से श्राप की वजह से गधा और गधी बने यह सब सुनकर बच्चा हैरान रह जाता है और सिद्ध बाबा से उनके मुक्त होने का उपाय पूछता है। तब सिद्ध बाबा कहते हैं, तुम्हें अब घर जाकर अपने माता-पिता पर यह जल छिड़कना होगा और वह पहले की तरह एक आदमी और औरत में परिवर्तित हो जाएंगे। तब बच्चा कहता है धन्यवाद बाबा, ऐसा बोलकर बच्चा सिद्ध बाबा का आशीर्वाद लेकर वहां से चला जाता है और घर आकर अपने मां और पिता जी से मिलकर उनके शरीर पर वो जल छिड़कता है और गधा गधी के रूप में उसके माता-पिता अब इंसान बन जाते हैं। यह सब देखकर बच्चा बहुत खुश हो जाता है और वह कुम्हार उसकी मां और पिता जी साथ में रहने लगते हैं और अपना जीवन अच्छी तरह से व्यतीत करते हैं।

सीख:- तो इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है। जिंदगी में कभी भी कोई भी काम संयम से करना चाहिए। जिंदगी में हमेशा जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए।

गधे के पेट में बच्चा भाग 1 पढ़ने के लिए, लिंक पर क्लिक करें।

Video Credits:- Hindi Kahaniya
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