गधे के पेट में बच्चा भाग 1 | Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 1

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गधे के पेट में बच्चा भाग 1 - Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 1
Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 1

गधे के पेट में बच्चा भाग 1, हिंदी कहानी | Gadhe Ke Pet Main Baccha Bhag 1, Hindi Kahani

रामपुर नाम के गांव में सुंदर नाम का एक लड़का रहा करता था उसके बाजू वाले घर में राधा नाम की लड़की रहती थी उन दोनों को एक दूसरे के प्रति बहुत प्रेम था इसी वजह से उन दोनों ने एक दूसरे से शादी कर ली थी। अब यह सारी बात उनके माता-पिता को पसंद नहीं थी। उनके माता-पिता को जब यह बात पता चली कि सुंदर और राधा ने शादी कर ली है तो वह उनके खिलाफ हो गए थे। उन्हें सब लोगों ने मिलकर गांव से बाहर निकाल दिया। अब सुंदर और राधा गांव के बाहर एक जंगल में रहने लगे। वहां कोई भी आता जाता नहीं था वहां उनके जान को कोई खतरा नहीं था। अब वह दोनों जंगल में बहुत अच्छी तरह से रहने लगे थे। मगर कुछ दिनों के बाद सुंदर को पता चलता है की राधा मां बनने वाली है, उसकी खुशी का कोई ठिकाना ही नहीं रहता वो राधा से बोलता है, राधा आज मैं बहुत खुश हूं मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है। तुम सोच भी नहीं सकती मैं आज कितना खुश हूं।

तब राधा कहती है, अजी आज मैं बहुत खुश हूं, आज मुझे मांस खाने की इच्छा हो रही है क्या आप मेरे खाने के लिए मांस लेकर आएंगे वो भी खरगोश का मुझे बहुत खाने का मन हो रहा है। तब सुंदर कहता है हां, मैं लेकर आऊंगा तुम्हारे लिए खरगोश का मांस मगर तुम यहां से कहीं जाना नहीं ठीक है। तब राधा कहती है, हां जी मैं यहां से कहीं नहीं जाऊंगी आप निश्चिंत रहिए। चलो मैं चलता हूं, ऐसा कहकर सुंदर वहां से चला जाता है और एक खरगोश को पकड़कर वहां लेकर आता है। खरगोश बड़ा ही उछल रहा था मगर उसे एक रस्सी से बांधकर वो उसे पकाता है और पकाने के बाद दोनों वो खरगोश को बड़ी अच्छी तरह से खाते हैं। राधा आज बहुत खुश थी उसने उसके मन के हिसाब से आज खाना खाया था। ऐसे ही बहुत दिन बीत जाते हैं राधा को अब तीन महीने पूरे हो रहे थे। राधा बड़ी खुश और तंदुरुस्त रहा करती थी। अब बहुत दिन बीत जाने के बाद भी राधा का खरगोश खाने का मन कम नहीं हो रहा था। उसके खरगोश खाने की चाह जैसे बढ़ रही थी अब वो एक दिन छोड़कर खरगोश खाने की मांग करने लगी थी और सुंदर भी उसे एक खरगोश पकड़कर लाकर खिलाता था मगर इसकी वजह से जंगल में खरगोश की संख्या अब कम हो रही थी।

इस वजह से खरगोश जंगल के सिद्ध बाबा के पास चला जाता है और कहता है, हे बाबा हमें बचा लीजिए हमें इस जंगल में कोई व्यक्ति आकर पकड़ कर खा लेता है और हम कुछ भी नहीं कर सकते। तब सिद्ध बाबा कहते हैं, कौन है वो जो जंगल के प्राणियों को मारकर खाने का दुस्साहस कर रहा है। तब खरगोश कहता है, एक आदमी है जो हर दिन आकर हमारा शिकार कर रहा है और हमारे साथियों को काट कर खा रहा है, तब सिद्ध बाबा कहते हैं, चलो मुझे बताओ वो कहां रहता है। अब बाबा बहुत क्रोधित होकर वहां से निकल जाते हैं और निकल कर सीधा सुंदर की कुटिया के पास पहुंच जाते हैं और वो देखते हैं कि खरगोश को सुंदर पका रहा है और उसको खाने की तैयारी कर रहा है। वहां खरगोश पकता देख वो बहुत क्रोधित हो जाते हैं और सुंदर से कहते हैं यह क्या कर रहे हो इन मासूम प्राणियों को मारकर क्यों खा रहे हो, तब सुंदर कहता है, नहीं – नहीं साधु महाराज आप मेरी बात तो सुनिए। तब सिद्ध बाबा कहते हैं, अब क्या बोलना चाहते हो, मेरे सामने खरगोश पका रहे हो और कहते हो कि मेरी बात सुनो यह बात बोलकर बाबा बड़े क्रोधित हो जाते हैं और अपने क्रोध में वो सुंदर और राधा को श्राप दे देते हैं। दोनों पति-पत्नी एक गधा और एक गधी बन जाते हैं। राधा और सुंदर जोर जोर से रोने लगते हैं यह सब देख वो दोनों बहुत दुखी हो जाते हैं और बाबा से कहने लगते हैं। बाबा आपने हमें श्राप दे दिया, मगर मेरी पत्नी प्रेग्नेंट है। इसी वजह से उसे खरगोश खाने का मन हो रहा था और इसी वजह से मैंने उसे खरगोश लाकर खिलाना शुरू किया।

तब राधा कहती है, बाबा आपने हमें जाने समझे बिना श्राप दे दिया और अब हम इस श्राप की वजह से कैसे उभरे आप ही बताइए। अब यह बातें सुनकर सिद्ध बाबा को बड़ा दुख हुआ कि उनके हाथों से बिना जाने समझे एक बड़ा पाप हो गया। वो उन दोनों से कहते हैं मैंने तुम्हारी बात ना सुनकर तुम्हें तुम्हारी गलती की सजा देती, मगर अब मैं कुछ नहीं कर सकता। अब मैं अपने श्राप को वापस नहीं ले सकता। तब सुंदर कहता है, बाबा अब हम क्या करें, आप ही हमें इसका उपाय बताइए बाबा। तब राधा कहती है, हम पर कृपा कीजिए बाबा तब बाबा उन्हें एक उपाय बताते हैं और कहते हैं अरे बेटा तुम्हें तुम्हारे बुरे कर्मों की सजा मिली है। अब तुम्हें जब बच्चा होगा वही तुम्हारी मुक्ति का कारण होगा। तब तक तुम दोनों को गधे का जीवन व्यतीत करना होगा। अब यह सब सुनकर राधा और सुंदर बहुत खुश हो जाते हैं और बाबा को प्रणाम करके वो दोनों वहां से निकल जाते हैं। अब चलते चलते रास्ते में उन्हें एक जंगल दिखाई देता है। तब सुंदर सोचता है और राधा से कहता है। राधा अब हमें इस जंगल में ही अपना सारा जीवन व्यतीत करना है। क्या तुम इस विचार से सहमत हो। तब राधा कहती है, हां पतिदेव मैं आपके विचार से सहमत हूं। अब वो अपना जीवन जंगल में व्यतीत करने लगते हैं। मगर वहां भी उनकी कठिनाइयां कम नहीं होती। उनके हिस्से में और कुछ भी लिखा था।

क्या राधा और सुंदर पुनः मनुष्य बन पाएंगे और उनके बच्चे का क्या होगा इसके लिए

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Video Credits:- Hindi Kahaniya
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