Friday, June 18, 2021
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मानव शरीर से जुड़े मजेदार व् रोचक तथ्य । Interesting Facts About Human Body

मानव शरीर से जुड़े रोचक तथ्य व् अनोखी जानकारी

 

1:- गला खराब होने पर नमक के गरारे करने को क्यों कहा जाता है ?

आमतौर पर गला खराब होने का मतलब है कफ जम जाना। कफ एक लसलसा पदार्थ है। ऐसा घोल जिसमें पदार्थ के बड़े – बड़े कण विद्युत आवेश के कारण घुले रहते। इमल्शंन कहलाता है। कफ भी इमल्शंन है। यदि इन कणों का आवेश खत्म कर दिया जाए तो ये घुलनशील हो जाते हैं। नमक या अन्य लवणों में यह गुण होता है कि वे इस आवेश को खत्म कर देते हैं। इस प्रकार से गले में मौजूद इमल्शंन को साफ करने में नमक मदद करता है। इसलिये गला खराब होने पर नमक के गरारे करने को कहा जाता है।

2:- शरीर संरक्षण में नमक क्या काम करता है ?

खाद्य पदार्थ के रूप में मछली को दूर – दूर तक भेजने के लिए नमक में रखकर भेजा जाता है। इसके अलावा हम यह भी देखते है कि आम, नींबू आदि को नमक के साथ रखने पर वे सड़ते नहीं। इसका कारण समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि सड़ना क्या होता है ? वास्तव में सड़ने का अर्थ है कुछ जीवाणुओं की क्रिया से रासायनिक बदलाव। नमक का एक गुण यह है कि कुछ जीवाणुओं की क्रिया को रोकने की क्षमता रखता है। दूसरी बात यह भी है कि नमक की मौजूदगी में कुछ जीवाणुओं की क्रिया जारी रहती है। परन्तु इस क्रियाओं से कुछ ऐसे पदार्थ पैदा होते हैं जो आगे की क्रिया को रोक देते हैं, इसके कारण सड़ने की क्रिया या तो रुक ही जाती है या धीमी पड़ जाती है।

3:- हमें छीक क्यों आती है ?

जब कोई पदार्थ नाक के अंदर चला जाता है तो नाक की म्यूकस झिल्ली में सुरसुराहट – सी होने लगती है। उस पदार्य को बाहर निकालने के लिए छींक आती है। इसी प्रकार जुकाम होने पर नाक की प्यूकस झिल्ली में सूजन आ जाती है और खुजलाहट होने लगती है, तब दिमाग पसलियों की मांसपेशियां और तंतुष्ट ( डायाफ्राम ) को हुक्म देता है और तुरन्त छींक आ जाती है। छींक आने के बाद शरीर में कुछ ताजगी – सी आ जाती है और आदमी हल्कापन महसूस करता है। विज्ञान के अनुसार छींक आना शरीर की एक प्रतिवर्ती क्रिया ( रिफ्लेक्स एक्शन ) है जो हमारी इच्छा के बिना होती है। छींक आने पर पूरा शरीर झन्ना जाता है और आंखें बंद हो जाती हैं।

मानव शरीर के बारे में रोचक बातें

4:- कुछ लोग नींद में क्यों चलते हैं ?

हमारे मस्तिष्क में एक नींद केन्द्र होता है। सारे दिन के काम करने के परिणामस्वरूप हमारे शरीर में लैक्टिक ऐसिड और कैल्शियम बनता है। जब कैल्शियम नींद केन्द्र में पहुचता है तब यह क्रियाशील हो जाता है और हमारे शरीर को नींद की अवस्था में ले जाता है। नींद की अवस्था में हमारे मस्तिष्क का सम्बन्ध शरीर के काम करने वाले अंगों से कट जाता है और नाड़ियों का सम्बन्ध मस्तिष्क से कट जाता है। परन्तु कुछ लोगों में नीद की अवस्था में मस्तिष्क तो सुप्तावस्था में रहता है। पर शरीर जाग्रत अवस्था में ही रहता है। यह नाड़ियों में कुछ असामानता होने के कारण होता है। इसी कारण ये लोग नींद में चलने लगते हैं।

5:- कुछ जानवर जैसे बिल्ली, कुत्ता, शेर आदि – सामने पैर करके क्यों बैठते हैं ?

इस सवाल का उत्तर जानवरों के भोजन तथा रक्षा के तरीकों से जुड़ा है। बिल्ली, कुत्ता, शेर मुख्यतः मांसाहारी हैं। आगे पैर करके बैठने में ये अन्य जानवरों के मुकाबले कहीं अधिक फुर्ती तथा तेजी से खड़े होकर अपने शिकार ( भोजन ) पर छलांग लगा सकते हैं। संकट आने पर भी फुर्ती से भाग – दौड़कर ये अपनी रक्षा कर सकते हैं।

6:- दाल पकते समय नमक पहले क्यों नहीं डाला जाता ?

परासरण क्रिया कैसे होती है यह तुमने देखा। दाल गलने का अर्थ भी यही है कि उसमें काफी मात्रा में पानी सोख लिया जाता हैं। पानी सोखने की यह क्रिया भी परासरण द्वारा होती है। यदि पानी में नमक डाल दिया जाए तो बाहर का घोल ज्यादा गाढ़ा हो जाएगा और दाल के अन्दर पानी नहीं जा पाएगा तो दाल भी नहीं गलयी। इसी कारण दाल पकते समय नमक पहले नहीं डाला जाता

7:- कुछ लोग सोते हुए खर्राटे क्यों लेते हैं ?

कुछ लोग नाक से सांस लेने की जगह मुंह से सांस लेते हैं। जब तक वे जागते रहते हैं तब तक तो उनके मुंह के अन्दर गले के पास वाली त्वचा खिंची रहती है परन्तु सोते समय यह ढीली पड़ जाती है। मुंह से सांस लेने के परिणाम स्वरूप हवा के दबाव के कारण इसमें कम्पन होता है जिसके कारण आवाज उत्पन्न होती है, जो हमें सुनाई देती हैं।

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